Skip to content
digiaccess
Cover of Rengati Parchhayan (Hindi Play)

Paperback₹250

Buy on Amazon

Rengati Parchhayan (Hindi Play)

by Uma Jhunjhunwala

2016100 pages

About the book

रेंगती परछाइयाँ श्रीमती उमा झुनझुनवाला का दिल को छू लेने वाला हिंदी का एक अदभुत नाटक है जिसमें उनकी भाषा शैली तथा सटीक संवाद दर्शकों को बांधे रखते हैं l उनके काव्यात्मक monologue दर्शकों को स्तब्ध कर देते हैं l ग़ालिब ने कहा था “हजारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले...” - एक साधारण व्यक्ति हमेशा अपनी अतृप्त इच्छाओं के बोझ तले दबा होता है l वह अपनी बहुत सी इच्छाओं को दरकिनार कर सकता है मगर भूख और यौवनावृति - ये दो इच्छाएँ ऐसी हैं जिनकी वह कभी उपेक्षा नहीं कर सकता l जिस प्रकार एक भूखे मनुष्य को रोटी न मिले तो वह चोरी भी कर सकता है उसी प्रकार एक युवा और स्वस्थ व्यक्ति को यौन इच्छा की पूर्ति का उचित मार्ग न मिले तो वो पथ-भ्रष्ट भी हो सकता है l इस नाटक में इसी कड़वी सच्चाई को पूरी जुरअत और बेबाकी से दिखाया गया है l ये नाटक हमारे सामने कई प्रश्न खड़ा करता है जिनका उत्तर देना आसान नहीं है l सलाम बिन रज्ज़ाक उर्दू हिंदी कहानीकार साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत

Editions

FormatISBNPrice
Paperback9789352071289₹250Amazon

Subjects

More by Uma Jhunjhunwala

See all →

More in Hindi and Other Indian Languages

See all →