प्रकृति के आँचल में (कविताएँ)
2019108 pagesHindi
About the book
सफर मिलो का हैं पहुचने मे वक्त लगेगा
कहानी मेरी कवितओ की है समझने मे वक्त लगेगा
प्रकृति मे मेरी रूचि तब बढने लगी जब मैं इस दुनिया से उबने लगा मुझे ऐसा लगा जैसे प्रकृति मुझ से कुछ कह्ना चाह्ती हो मैं उसकी ओर खिचा जा रहा था।मुझे ऐसा लगता,प्रकृति मे एक ऐसी शांति है जिसको रब्ब ने बडी खुबसूरती से बनाया है ओर इन्सान उस को नजरअनदाज कर जीवन के कार्य मे व्यस्त हैं । इन्सान सकून भरी ज़िंद्गी ढूढ रहा है जो हमे यह प्रकृति दिखा रही है।यह प्रकृति है तो हम है नही तो हमारा कोई बजूद नही है प्रकृति ह्मे सब दिखा रही है प्रकृति मे एक ठहराव है,प्रकृति मे ईश्वर है प्रकृति के आँचल में सब है।जिसमे मैंने बृक्ष की कहानी, जंगल,मैं और मेरी ख़ामोशी,आत्मा, मुर्शिद, समंदर को नदी का इंतज़ार, सन्नाटा, धर्मशाला का क्रिकेट मैदान, जिंद्गी, सृषटी, ढ्लती उम्र, वक्त सीखा रहा। बहुत सी ऐसी कविताए जो यह मेरी किताब आपको सब बता रही है।
Editions
| Format | ISBN | Price | |
|---|---|---|---|
| Paperback | 9789389110234 | ₹295 |
Subjects
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