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Cover of Boond-Boond Shabd

Paperback₹295

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Boond-Boond Shabd

by Manjit Manvi

2017118 pagesHindi

About the book

सम्प्रेषण और संवाद हर दौर मे इंसान की बुनियादी ज़रूरत रहे हैं। फिर क्यों दिल की बात सच्चाई के साथ दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना और दूसरे व्यक्ति की बात स्वयं पूरी तरह सुन पाना आज इतना दुर्लभ हो चला है। तकनीक प्रधान इस युग मे संवाद के तौर तरीके भी मानवीय सार की अनदेखी कर तकनीकी दाव पेच मे अधिक सिमटते जा रहें हैं । चारों तरफ ठन ठन बजते खाली शब्दों की भरमार है जब कि मन सीधी सच्ची बात कहने सुनने को तरसता है। कविता एक ऐसा माध्यम है जो शब्दों को न केवल उचित संदर्भ, बल्कि संवेदना और संयम की कसौटी भी प्रदान करता है। सही शब्द की तलाश कविता की एक मूल ज़िम्मेदारी है। कविता न केवल मन के भावों को कागज़ पर उकेरती है, बल्कि अपनी सटीक और ईमानदार अभिव्यक्ति के ज़रिये उन तमाम छिपी हुई जगहो, टकरावों और संभावनाओं को भी बेबाकी से हमारे बीच लाती है जो रोज़मर्रा की भाग दौड़ मे हम अनेक बार देख नहीं पाते हैं। और इस तरह मन की बात कहने के साथ साथ कविता, समाज की विभिन्न जटिलताओं से सीधा संवाद कायम करते हुए, अपनी सामाजिक राजनैतिक ज़िम्मेदारी भी बखूबी निभाती है। यही कविता का मर्म है, और यही इसकी ताकत भी! मेरा दूसरा कविता संग्रह “बूँदबूँदशब्द” इसी दिशा मे एक छोटा सा प्रयास है। एक ऐसे दौर मे जब अभिव्यक्ति पर चारों ओर से हमला है, दबी कुचली व अनकही बातों का सुनना सुनाना, नित नए शब्दों का बुना जाना और मन की सच्चाई का पूरी निर्भयता और गरिमा के साथ सामने आना ही इंसान और इंसानियत मे यकीन को बचाए रख सकता है।

Contents

  • सरल प्रवाहमयी भाषा, मार्मिक बिम्ब और उपमाएँ, प्रतिगामी सामाजिक ढांचों, परम्पराओं, शास्त्रों के प्रतिरोध में चिन्हित की गई विषयवस्तु और एक तरह की गीतात्मकता मनजीत की लेखन शैली की विशेषता है। उनकी कविता मे अभिधा और व्यंग्य, गीतात्मकता और वर्णनात्मकता (जो इतिवृतात्मक नहीं है) निजी और सामाजिक एक स्वाभाविक प्रवाह के साथ मौजूद हैं। इनका संबंध एक समाजोन्मुख निजता से है जिसमे वैयक्तिकता अर्जित करने का आग्रह है। वही वैयक्तिकता जो नागरिक मनुष्य का आधार है और स्त्रियों के लिए वर्जित रही है। सामाजिक दोगलेपन, भेदभाव, पुरुषवाद और ‘कमज़ोर’ के उत्पीड़न के खिलाफ एक परिपेक्ष्य इन कविताओं मे मौजूद है। ये कविताएं कई बार नवजागरण के दौरान रचे गए गीतों और कभी कभी उर्दू के प्रवाहमय द्वन्दों की याद दिलाती हैं। (‘जटाजाल’,‘एक बूंद के मायने’,‘निकृष्टतम पाठ’) लेकिन ये निश्चित रूप से आगे की कविता है जिसमे समकालीन यथार्थ और उसके लिए एक चुनौती मौजूद है। यह संग्रह मनजीत मानवी के समृद्ध काव्य अभिव्यक्ति के प्रति आश्वस्त करता है।

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Paperback9789352074891₹295Amazon

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