बाट जोहते रहे…
2018222 pagesHindi
About the book
तरुण कानूनगो की कवितायें एक ऐसे रचनाकार की आत्माभिव्यक्ति है जो किसी भी स्तर पर अपने बुनियादी सिद्धांतों से समझौता नहीं करता औरअपने विश्वासों को लेकर संघर्ष करता रहता है. तरुण कानूनगो केवल अपनेलिए लिखते हैं और उनके लिए यही महत्वपूर्ण रहा है की वे अपनी भावनाओं कोनिर्बंध रूप से व्यक्त करते रहें. उनकी कविताएँ उनके आत्म जगत का प्रकाश है जोबाहरी जगत को भी दीप्तिमान करताहै. इन कविताओं में एक दार्शनिक चिंतनउभरता है. इस चिंतन से उनकी कविताओं में यथार्थ से कल्पना और कल्पना सेयथार्थ तथा फिर कल्पना एवं यथार्थ से परे एक सौन्दर्यमयी चेतना साकार होती है.इस संकलन में तरुण कानूनगो की सुदीर्घ कवितायें सम्मिलित हैं जो हिंदी की एकविरल रचना शैली को नया आयाम देती है. इन सुदीर्घ कविताओं में सामान्य से परेबिम्ब उभरकर आते हैं. इन बिम्बों में कहीं पौराणिक मिथक साकार होता है तो कहींद्वंद भरे वैश्वीकृत समय की विद्रूपता. उनकी कविता वाचन से कहीं अधिक मनन केलिए हैं. यह एक कारण हो सकता है की अभी तक उनकी कविताओं पर समीक्षात्मकविमर्श जितना होना चाहिए नहीं हो पाया है.
डा . सुशीलत्रिवेदी . आई . ऐ . एस .
साहित्यकार एवम् आलोचक
पूर्व इलेक्शन कमिश्नर, छत्तीसगढ़, रायपुर
Editions
| Format | ISBN | Price | |
|---|---|---|---|
| Paperback | 9789388008037 | ₹365 |
Subjects
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